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जैविक विधि से सब्जियों की पैदावार तीन गुणा- अमरीक मलिक

कैथल: जिला के गांव हजवाना के युवा, शिक्षित व प्रगतिशील किसान श्री अमरीक मलिक ने खेती की परम्परागत विधि को छोडक़र कृषि के क्षेत्र में जैविक खेती, आधुनिक उपकरणों के उपयोग से खेती को बढ़ावा देकर इस क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। युवा 42 वर्षीय अमरीक मलिक ने जैविक विधि से सब्जियों की पैदावार तीन गुणा बढ़ाकर तथा गेहूं, मूंग, धान के उन्नत किस्म के बीज तैयार करके इस क्षेत्र के अन्य किसानों को भी नई दिशा दिखाई है। युवा किसान ने केवल जैविक विधि से गाजर, मूली, पालक, धनिया, मटर, टमाटर, मेथी, चुकंदर की खेती करके अन्य किसानों को सब्जियों से भारी मुनाफा कमाने के लिए प्रेरित किया है। इसके साथ-साथ खेतों में बांस लगाकर सब्जियों की खेती की पैदावार को तीन गुणा तक बढ़ाया है। इस कार्य में इस किसान को पहले सब्जियां बिक्री के लिए दिल्ली व अन्य स्थानों पर वाहनों की व्यवस्था करके भेजनी पड़ती थी, वहीं अब जैविक विधि से तैयार सब्जियों की मांग स्थानीय स्तर पर इतनी बढ़ी है कि उनकी सब्जियां स्थानीय मंडी में ही अच्छे दामों पर बिक जाती है तथा इनकी सब्जियां अच्छी गुणवत्ता की होने के कारण यह मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।
श्री अमरीक मलिक ने बीए, बीएड करने के बाद खेती को ही अपने रोजगार का जरिया बनाकर इस दिशा में अधिक ध्यान दिया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत और लग्र रंग लाई और सब्जियों के व्यवसाय से भारी मुनाफा होने लगा। इस कार्य में जिला उद्यान विभाग के अधिकारियों से विशेषज्ञ सेवाएं समय-समय पर मिलती रही। प्रगतिशील किसान ने उन्नत किस्म के गेहूं, मूंग और धान के नई किस्म के बीज तैयार करने में भी सफलता प्राप्त की। श्री अमरीक मलिक ने बताया कि एक फसल के उन्नत किस्म के बीज तैयार करने में 12 वर्ष का समय लगता है तथा उन्होंने ऐसे गेहूं के बीज तैयार किए हैं, जो प्रति एकड़ 32 क्विंटल तक पैदावार ले सकते हैं। उन्होंने धान व गेहूं की फसल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 14 एकड़ में फुव्वारा प्रणाली से सिंचाई की नई तकनीक को ईजाद किया है। इस नई फुव्वारा प्रणाली से सिंचाई की नई विधि के लिए उपकरण उद्यान विभाग की तरफ से सबसीडी पर प्राप्त किए है। फुव्वारा सिंचाई से भी फसल उत्पादन दोगुणा होने में मदद मिलती है।
प्रगतिशील किसान अमरीक मलिक ने सब्जियों की जैविक खेती आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल के साथ-साथ खेती में धान की फसल कटाई के बाद फानों व बचे अवशेषों से खाद तैयार करने की विधि को भी अपने खेतों में लागू करके प्रदूषण को रोकने में मदद की है। धान के फानों को खेती में बुआई के समय हैपीसीडर से बिजाई करके उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुर्ई है। उन्होंने बताया कि धान के बचे हुए फाने अगली फसल की बिजाई में एक अच्छे खाद के विकल्प के रूप में उपयोगी सिद्ध हुए हैं। उन्होंने जिला के किसानों को सलाह दी है कि धान व गेहूं फसल की कटाई के बाद फानों को आग न लगाकर उसकी जमीन में ही बुआई के समय उपयोग करके खाद के रूप में उपयोग करें, इससे जमीन के अंदर उर्वरा शक्ति में बढ़ोत्तरी होगी तथा फाने जलाने से प्रदूषण में होने वाली वृद्धि से भी बचने में मदद मिलेगी।
जिला उद्यान अधिकारी डा. जगफूल सिंह ने बताया कि उद्यान विभाग की तरफ से किसानों के लिए फुव्वारा सिंचाई, बाग लगाने, पॉली हाउस, आलू बोने की मशीन, नेट हाउस, खुंबी उत्पादन, मधुमक्खी पालन, हाईब्रिड सब्जियां, फूलों की खेती व मसालों की फसल उत्पादन करने वाले किसानों के लिए सब्सिडी का प्रावधान है। किसान अपने-अपने खेतों में फूलों व फलों की खेती को बढ़ावा देकर छोटी जोत में ज्यादा लाभ कमा सकते हैं। उन्होंने जिला के किसानों से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने खेतों में इन नई तकनीकों का इस्तेमाल करके उद्यान विभाग की नई योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं।

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