Sangameshwar Mahadev Temple Pehowa:

भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर जहा नाग-नागिन आकर भगवान के शिव लिंग में अपने शीश नवाते है. ऐसा अद्भुद चमत्कार हर साल पिहोवा से लगभग पांच किलोमीटर दूर उत्तर पूर्व अरुणाय में दोहराया जाता है. यहाँ संगमेश्वर महादेव मंदिर(Sangameshwar Mahadev) में एक नाग-नागिन का जोड़ा आकर भगवान शिव के लिंग की प्रतिमा कर उनको शीश नवाता है तथा मंदिर के लोगो को बगैर नुकसान पहुँचाय वहाँ से वापस चला जाता है, श्रद्धालु इसे भगवान का चमत्कार मानते हैं.

धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के सबसे प्राचीन मंदिर(Sangameshwar Mahadev Temple) में से एक है तथा इस मंदिर की मान्यता है कि यहां देवी सरस्वती ने श्राप से मुक्त होने के लिए भगवान शिव की अराधना की थी. तभी इस शिवलिंग की स्थापना हुई थी और यह मंदिर(Sangameshwar Mahadev Temple) मनोविज्ञान का केंद्र भी है | यहाँ भगवान शिव के दर्शन करने से मन को शांति मिलती है. मानशिक रूप से परेशान व्यक्ति यहाँ शिव को जल चढ़ाते है और तनाव से मुक्ति पाते है | यह तीर्थ अरुणा और सरस्वती नदी के संगम पर स्थित है और इसके निकट सरस्वती नदी बहती है. यह भगवान शिव स्वयं लिंग के रूप में उत्पन हुए थे ,जो स्वंयभू लिंग के रूप में मुख्य मंदिर(Sangameshwar Mahadev Temple) में आज भी विराजमान हैं. मान्यता है की यह शिव के जलाभिसेक ,पूजन कर बेल के पेड पर धागा बाँधने से मनोकामना पूर्ण होती है | मन्नत पूरी होने के बाद पूजा व धागा खोलने के लिए दोबारा श्रधालुओ को आना पड़ता है.

मंदिर(Sangameshwar Mahadev Temple) की परिचय पुस्तिका के मुताबिक यहां दूध बिलोकर मक्खन नहीं निकाला जाता | यदि कोई प्रयास करता है तो दूध खराब होकर कीड़ों में बदल जाता है, मंदिर परिसर में खाट अर्थात चारपाई का प्रयोग नहीं किया जाता | यदि कोई व्यक्ति यहां अशुद्धि फैलाने का प्रयास करता है तो उसे दंड अवश्य मिलता है!

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