आँखों में जलन है , अजीब सी गंध है वातावरण में , हरियाणा में !सुन रहें हैं दिल्ली में ज्यादा है !स्कूल भी बंद होने लगें हैं ! सब परेशान हैं ,क्या हो रहा है ये !एक ने बताया मैने टीवी पे देखा ‘ पंजाब और हरियाणा के किसान पराली जला रहे हैं जिसके कारण ये प्रदुषण बढ़ रहा है !दूसरा कारण दिवाली के पटाखे !मैने सोचा शायद यही कारण हैं !फिर थोड़ा पढने ,समझने की कोशिश की !इसी बीच ‘आज तक ‘ चैनल पर अरविन्द केजरीवाल का इंटरव्यू देखा ,केजरीवाल जी कह रहे हैं सबसे बड़ा कारण हरियाणा और पंजाब में किसान फसलें जला रहे हैं ,जी हाँ केजरीवाल साहब ने यही शब्द प्रयोग किया फसलें !अब इस समस्या पर थोड़ा विचार करते हैं !क्या ये इसी वर्ष हुआ ,नहीं , मैने इसी समस्या पर 2012 में एक लेख पढ़ा !तब आँखों में जलन दिल्ली में थी अब हरियाणा में भी है!उस लेख में लिखा था उस समय दिल्ली में 70 लाख वाहन थे !कारण तब भी हरियाणा पंजाब बताया जा रहा था !उस समय बताय गया कि अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने तस्वीर ली है कि
हरियाणा ,पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फसल अवशेष जलाने से प्रदुषण बढ़ रहा है !अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित देशों और तीसरी दुनिया कहे जाने वाले विकासशील देशों में लंबे समय से एक बहस चल रही है ! विकासशील देश कह रहे हैं कि प्रदुषण का कारण औद्योगिक विकास है जिसका मूल विकसित देश हैं !विकसित देश कह रहे हैं कि विकाशील देश हैं कारण दिया जाता है विकासशील देशों का परंपरागत आर्थिक और सामाजिक ढांचा जैसे भारत में फसल अवशेष जलाना!अमेरिका पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय क्योटो संधि को न मानने के लिए ऐसे बहाने तैयार करता है!और हम मान लेते हैं !, !धान के सीजन से ज्यादा फसल अवशेष गेहूं के सीजन में जलाये जाते हैं खेती से जुड़ा बच्चा भी जानता है !लेकिन समस्या इस समय क्यों’!!2012 के उस लेख में एक शोध का जिक्र करते हुए कहा गया था कि जाड़ों में हवा में नमी के कारण प्रदूषण ज्यादा ऊपर नहीं जा पाता और जमीन के ऊपर ही तैरता रहता है। इस प्रदूषित हवा या धुंध में विभिन्न किस्म के कण ठहर जाते हैं। इनमें सल्फर डाइआक्साइड (एसओ2), नाइट्रोजन डाइआक्साइड (एनओ2) तथा पार्टिकुलेट मैटर (पीएम10) यानी अन्य किस्म के कण होते हैं जो दृश्यता को घटाने के अलावा स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक होते हैं।मतलब धुआं हवा में नमी के कारण ऊपर नही जाता इस कारण आँखों में जलन या प्रदुषण में वृद्धि नजर आती है !लेकिन धुआं आता कहां से है !क्या सिर्फ फसल अवशेष से! ना !बच्चा भी बता सकता है कि प्रदुषण का बड़ा कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और फैक्टरियां हैं या खेतों में जलने वाले फसल अवशेष !लेकिन जिन लोगों को ये नहीं पता कि किसान फसल जलाते हैं,पराली जलाते हैं या फसल अवशेष, वो लोग किसानों पर कार्रवाई की बात करते हैं ! कुछ लोग अपने इंटरव्यू में कह रहे हैं की फसल जलने से कुछ मीडिया के लोग कह रहे हैं की पराली जलाने से, .क्या किसान फसल जला सकते हैं नही बिलकुल नही !और ये भी बता दूँ पराली का रेट भी लगभग 4000 रुपये प्रति एकड़ है क्या किसान उसे जला सकता है! लेकिन जो खेत में ही नही गया वो क्या जाने ! अगर वो लोग खेत में जाये तो समझ में आएगा किसान क्या जलाता है और क्यों जलता है और समाधान क्या है !किसान को चाव नही है पर्यावरण प्रदूषित करने का और आग लगाकर अपने खेत की उपजाऊ शक्ति कम करने का !हरियाणा में तो 1406 किसानों पर जुर्माना कर भी दिया गया फसल अवशेष जलाने को लेकर !फसल अवशेष जलाना उसकी मजबूरी है , विकल्प दे दो वो छोड़ देगा !लेकिन विकल्प खेत में जाकर दिया जाये एयर कंडीशन ऑफिस में बैठकर नही !ये जो आँखों में जलन से प्रदुषण बढ़ने की जानकारी हमें मिली है ये हवा में नमी के कारण धुएं का ऊपर ना जाना है !और धुआं दिल्ली बढ़ा रही है हरियाणा या पंजाब नहीं ! हरियाणा पंजाब रोटी उगाते है अगर उससे प्रदुषण बढ़ता है तो मज़बूरी है ,लेकिन दिल्ली गाड़ियां बनाती है उन पर लोन देकर कहती हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीदो !ये जिंदगी की जरूरत नही जिसके बिना जिया ना जाये ! आप अपने शोक कम करिये तब किसान को अपनी बुनियादी जरूरतों पर लगान लगाने के लिए बोलिये ,जो जरूरतें आपकी भी हैं !आरोप हरियाणा और पंजाब को लगाना चाहिए कि दिल्ली की गाड़ियों के धुएं ने अब हमारा भी जीना मुश्किल कर दिया है ! (जसबीर आर्य )

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