दो साल पहले एक न्यूज़ आई एक लड़की की शादी को 1 वर्ष हुआ था ,अभी तक कोई बच्चा भी नहीं था , और उसके पति ने नसबंदी करवा ली ,क्यों ,क्योंकि शराब पीने के लिए पैसे नहीं थे ,तो उसने नसबंदी के लिए सरकार ने जो प्रोत्साहन राशि तय की है उसे प्राप्त करने के लिए नसबंदी करवा ली ,ताकि वो शराब पी सके ! बहुत सी खबरें हम पढ़ते है की बेटे ने माँ की हत्या कर दी ,बेटे ने पिता की हत्या कर दी ,पति ने पत्नी की हत्या कर दी ,और ऐसी बहुत सी घटनाओ का कारण होता है आरोपी को शराब के लिए पैसे न मिलना !अगर कोई एक्सीडेंट होता है,या कोई लड़ाई झगड़ा होता है या किसी महिला से छेड़छाड़ की कोई घटना होती है तो पुलिस तहकीकात का पहला सवाल होता है की घटना नशे में तो नही हुई ,मतलब 80 % आपराधिक घटनाओं के पीछे नशा है ऐसी सम्भावना को कोई नहीं नकार सकता , ऐसी घटनाएं आम हैं !और हमारा संवेदनशील समाज और अति संवेदनशील सरकारें इन घटनाओं पर विचार करना छोड़ चुके है ! लेकिन एक पति ने केवल सरकारी प्रोत्साहन राशि को प्राप्त करने के लिए नसबंदी करवा ली बिना किसी संतान के, शायद वो इस संतान सुख के महत्व को नहीं जानता था ,लेकिन उसकी पत्नी इस सुख को निश्चित जानती थी ,जिसकी उसके पति ने जरा भी चिंता नहीं की !लेकिन कौन करे उसकी चिंता क्या सरकार को अपनी जनता की चिंता नहीं करनी चाहिए जो कल्याणकारी राज्य देने का वादा करती है ! देश जब अंग्रेजों का गुलाम था तब बालगंगाधर तिलक ने शराब बंदी के लिए आवाज उठाई थी ,और उनकी आवाज का असर था कि अंग्रजों की सरकार ने आबकारी विभाग को नोटिस जारी किया था कि आबकारी नीति बनाते समय सामाजिक हित को ध्यान में रखा जाये ! वो सरकार जो यहाँ सिर्फ शोषण के लिए थी वो सरकार समाज के हित की चिंता की बात करे ये ही बड़ी बात है !और आज की सरकारों के लिए वो घटना भी ध्यान देने के लायक नही है जिसमे एक बेटी की गोद सुनी रह जाये इसलिए क्योंकि सरकार ने उसके पति को नसबंदी कराने के लिए पैसे दिए ताकि वो शराब पी सके ! अगर जरा भी किसी दिल में संवेदना है और इस घटना पर विचार करे और उस बिन बच्चे की माँ का दर्द मसहूस कर ले तो वो समझ सके की समाज कहाँ आ गया !समाज को इस स्थिति में लाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकारों की है !”यथा राजा तथा प्रजा” ये उक्ति हम बचपन से सुनते आ रहे हैं,जब सरकार में ही कहीं संवेदना दिखाई नहीं देती तो प्रजा से क्या उम्मीद की जा सकती !अभी का एक प्रकरण है ,हरियाणा के कितने ही गाँवो की पंचायतों ने सरकार को प्रस्ताव पारित करके दिया कि हमारे गांव में शराब का ठेका न खोल जाये ताकि ये पंचायतें युवाओं को शराब और अन्य नशों से दूर रखने के लिए प्रेरित कर सकें, इसके लिए ठेका बंद होना जरुरी है ! इन गांवों में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा गोद लिया गांव भी है ! परन्तु आबकारी विभाग ने इन बहुत से गांवों के प्रस्तावों को ठुकरा दिया और कहा की ठेका खोला जायेगा !दलील दी गई कि इन गांवों में अवैध शराब के मुकदमे बढ़े है पिछले सालों में ! सरकार से पूछा जाये कि आपने गांव को जिम्मेदार ठहरा कर ,कि यहाँ अवैध शराब के मामले बढ़े है ,और कहा की इसका इलाज ठेका है ,इसलिए ठेका खुलेगा !क्या सरकार ने ये सोचा कि पिछले कई दशकों से यहाँ ठेका है फिर भी अवैध शराब के मामले हैं तो ठेका इलाज कैसे ! या कारण को ढूंढने और ख़तम करने की किसी सरकार में योग्यता ही नही ,या नीयत नहीं !क्या आने वाले सालों में अफीम की खपत भी बढ़ गई तो सरकार द्वारा अफीम के भी ठेके खोलकर इलाज किया जायेगा ,क्या वेश्यावृति का भी इलाज यही है ! जब अंग्रेजो का राज्य था वो कहते थे की आबकारी नीति को बनाते हुए समाज के हित को ध्यान में रखा जाये ,देश उनका नहीं था फिर भी वो चिंता का दिखावा तो करते थे !आज तो मुख्यमंत्री के गोद लिए गांव के समाज की चिंता नही सरकार को फिर उस बेटी की किसे चिंता जिसके पति ने सरकारी प्रोत्साहन राशि के लिए नसबंदी करवा ली बिना संतान के !वाह रे मेरे देश की सरकारों !जो समस्या को ही समाधान समझती हैं !

Related Posts

No data
He led the Lightning with 17 points in 17 playoff games last season, and his 58 postseason Wholesale ...
No data
No data
No data
Looks like it's going to take more than a well-enforced curfew to help this team pick up some ...
No data
No data
No data
Residents selected to purchase tickets this year will receive Mobile Ticketing instructions along ...
No data
No data

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Skip to toolbar